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पिछले 6 सालों में एक आदत सी पड़ गयी थी मुझे या यूँ कहूँ कि एक बुरी आदत। क्योंकि पिछले 6 सालों में मेरे जन्मदिन पर उससे पहले कोई और विश (शुभकामनाएं) नहीं कर सका। लेकिन इस बार उम्मीद नहीं थी कि उसका वो जज्बा कायम रहेगा, शादी जो हो चुकी थी उसकी।

“सब कुछ कितनी जल्दी बदल जाता है न... आदत भी एक दिन में छूट जाती है... इंसान भी सात फेरो के बाद पराया हो जाता है....” जन्मदिन की एक रात पहले उसे और उसकी बातों को याद करते–करते तकरीबन 10 बजे...

-दवाई लाए?
-दवाई!
-हां दवाई, भूल गए?
-याद ही नहीं दिलाया तुमने।
-मैं नहीं रहूंगी तो कौन याद दिलाएगा?
-ऐसा होगा ही नहीं कि तुम न रहो।
-एक दिन मैं रहूंगी ही नहीं जैसी आपकी हरकतें है। :'(
 

#तेरा_अंश
~ Alfaaz 'अल्फाज़'

"हमारी ज़िन्दगी भी कितनी सिमट सी गयी है या यूँ कहें कि Surface Tension जैसी हो गयी है। बस सिकुड़ती ही जा रही है। अपनों के इर्द गिर्द सिकुड़े तो गनीमत हो लेकिन सिर्फ इन्टरनेट पर आ कर सिमट गयी है। Emotions virtual हो गए है, रिश्ते virtual हो गए है, खुशियाँ virtual हो गयी है, थकान virtual हो गयी है और तो और जबसे विडियो कॉल आ गया है तबसे मिलना तक virtual हो गया है।
हम तो सिर्फ status like करके अपने आप को देशभक्त समझने लगते है और हनुम...

“आज तक उसने कोई काम मुझसे बिना पूछे नहीं किया। यहाँ तक कि election में भी मुझसे ही पूछा था कि वोट किसको दे। कहने को 23 साल की हो चुकी थी और मुझसे भी दो साल बड़ी थी लेकिन भरोसा मुझपर था खुद से भी ज्यादा। सड़क पर किसी फौजी को जरा देख भी ले तुरंत मुझे फ़ोन करती और कहती थी, “तुझे यूनिफार्म में देखना है मेरेको”। और मैं भी हाँ में हाँ मिला दिया करता था।
चाहे CCD में कॉफ़ी की choice हो या कॉलेज की canteen की लिस्ट में से कुछ लेना हो, हमे...

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