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"बारिश की पहली बूंदों से, जब याद तुम्हारी आती है, 
मिट्टी की भीनी खुशबू तब, तन की मिट्टी में धंस जाती है।

आंखें मूंदे जब बूंदों से, भीग जाएगा तन सारा,

गीले गालों को छूकर, तब याद तुम्हारी आती है।

हाथों से छूकर जब वो बूंदें, मिट्टी पर धंस जाती है,
मिट्टी सी वो तन की खुशबू, तब याद तुम्हारी आती है।

होठों को रसती सी बूंदें, सीने तक ढल जाती है,
पलको में बूंदों को भींचे, तब याद तुम्हारी आती है।

खिलती है यौवन की बूंदें, जब सारी बातें चुक ज...

मेरे मरने के बाद मेरी कहानी लिखना, 

कैसे बर्बाद हुई मेरी जिंदगानी लिखना।

रोशन करना कभी दिये तुम मेरी यादों के, 

कैसे मशहूर हुई मेरी रवानी लिखना।

और लिखना कि कैसा था मेरा इश्क़ रगों में, 

मैं लौट आऊ फिर ऐसी कोई बयानी लिखना।

लिख देना अगर दिल करे तो मेरा ऐतबार भी, 

मेरी हर बात को अपनी जुबानी लिखना।

लिखने बैठो तो लिख देना मेरे सारे जज़्बात, 

अपने लिए मेरी दीवानी लिखना।

लिख सको तो लिखना मेरा मर जाना, 

और अपने इश्क की बेईमानी लिखना।

कलम उठाकर लिख...

सर पर सजा सिन्दूर तेरे पूछेगा तुझसे कभी, 
क्या यही वो है समर्पण जिसका तुम्हे इकरार था।

किये थे वादे बहुत रात उस चांदनी में, 
अब कहो कि कसम तुम्हे है क्या यही वो प्यार था।

खाई थी कसमे कभी नाम मेरे मंगलसूत्र की, 
अब कहो कि नाम किसका सजा तेरे इस बार था।

होठों की लाली कहेगी मुस्कान किसकी थी कहो, 
फिर सिसक कर तुम कहोगी यार वो एक राग था।

धुल गया है जिसका प्रतिबिम्ब आसुंओं की धार में, 
कह दिया है अब सखी वो सिर्फ एक आधार था।

तब कहोगे भूलकर...

मैं अपनी जिंदगानी लिखता जा रहा हूं,

लोग शायर समझ मशहूर किये जा रहे हैं।

मैं तुम्हें 'अल्फाज' में लिखता जा रहा हूं,

लोग किताब समझ पढ़ें जा रहे हैं।

मैं तुम्हारे गीत लिखता जा रहा हूं,

लोग गज़ल समझ गाए जा रहें हैं।

मैं तुम्हारी सांसे लिखता जा रहा हूं,

लोग मुझे तुम्हारी जान कहे जा रहें हैं।

मैं तो तुम्हारा प्यार लिखता जा रहा हूं,

लोग शायर समझ मशहूर किये जा रहें है।

~ King Kuldeep 'अल्फाज़'

© Protected

वो पर्दा जब जब मेरी खिड़की का खुल जाता है,

कोई दूर खड़ा मुझसे मेरी आखों में घुल जाता है।

सीने को छल जाती है, वो भीनी सी मुस्कान तेरी,

फिर तेरी जुल्फों का शायर, मेरी साँसों में घुल जाता है।

जब जब लिखता हूँ फिजा तेरी, तब तब कागज़ उड़ जाता है,

कलम मेरी रोती है, शायर नम हो जाता है।

अब तो लिखता हूँ तेरी हर छोटी बातों को,

वो प्यार जताना तेरा मुझपर, न सोना मेरा रातों को।

अब न पर्दा खुलता है न वो आती है,

मेरी जान मुझे वो तडपाती है...

~अल्फाज़

©Protec...

तुम्हे भूल गया तो मैं लिख नहीं पाऊंगा, 

न कलम रिसेगी मेरी न गीत मैं गाऊंगा.

न लब खुलेंगे मेरे न बंसी मैं बजाऊंगा, 

तुम्हे भूल गया तो मैं लिख नहीं पाऊंगा.

न सिलवाटे होंगी बिस्तर पर न ख्वाब मैं सजाऊंगा,

न काली होगी कालिक तो मैं लिख नहीं पाऊंगा.

नहीं मरेंगे दिलबर माशूक पर, न तहरीर कोई सजाऊंगा,

तेरी मुस्कान भूल गया तो मैं लिख नहीं पाऊंगा.

न देखूंगा हथेली तेरी, न अपनी लकीरों से मिलाऊंगा,

न चोट लगेगी दिल पर मेरे तो मैं लिख नहीं पाऊंगा.

न सासे...

संघर्ष जिसका पेशा है, एहसासों को जो जीता है।

मार कर कभी एहम को, कभी वेदनाओं को पीता है।

मुड़ जाता है खुद कभी, कभी रुख हवाओं का मोड़ देता है।

हाँ मैं हूँ वो चरित्र. जो बदल फिजाओं को देता है।

प्रेम को कसकर कमर से अपने, जो इम्तिहान हर पल देता है।

ग़मों से है जिसका रिश्ता पुराना, ख़ुशी से सौदा कर जो जीता है।

मैं ही वो चरित्र हूँ जिसका, कोई चित्र नहीं जीवन में।

कह सकता हूँ बुलंद आवाज़ में, हर रंग से भरा जीवन जीता हूँ।

प्रण लेता है मिट्टी भूमि क...

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