home

contact us

Contact Us

  • Black Facebook Icon
  • Black Twitter Icon
  • Black Instagram Icon

To Get quick replies to your queries, write us at 

faujikealfaaz@gmail.com or WhatsApp us at

+91-880-29-880-88

2538/6, E-II-66, Badarpur, New Delhi-110044

“दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उलफत, मेरी मिट्‌टी

से भी खुशबू-ए वतन आएगी।”

 

~शहीद ए आजम सरदार भगत सिंह 

'मेरा रंग दे': अमर शहीद ​सरदार भगत सिंह को पूर्णतः समर्पित पेज

20 दिसम्बर: भगत सिंह के साथी और गदर पार्टी से जुड़े बाबा सोहन सिंह भकना जिन्हें आज़ाद भारत में मिली थी एक गुमनाम मृत्यु

December 20, 2017

सरफरोशी की तमन्ना... का इतिहास

December 19, 2017

शहीद भगत सिंह

September 28, 2017

खुदीराम बोस पुण्यतिथि

August 11, 2017

1/1
Please reload

December 20, 2017

आज़ादी के वो क्रांतिदूत जिन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर किया, इस देश और इस धरा के लिए उनके त्याग को सदा ही छिपा कर रखने वाले वो तमाम नकली कलमकार और आज़ादी के झूठे ठेकेदार आज का दिन याद ही नहीं करते। उन तमाम अमर बलिदानियों में से एक हैं बाबा सोहन सिंह भकना जी जो शहीद भगत सिंह जी के सहयोगी रहे थे। 
सोहन सिंह का जन्म 1870 में पंजाब के अमृतसर जिले के खुतरे खुर्द गांव में हुआ। बचपन में ही उनके पिता का देहान्त हो गया तथा उनकी मां...

December 19, 2017

जब-जब काकोरी कांड की बात आती है, तब-तब स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल का नाम तुरंत जहन में आ जाता है। और इसी कांड के सिलसिले में आज के दिन यानी 19 दिसम्बर 1927 को अंग्रेजी हुकूमत ने रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर की जेल में सुबह 8 बजे फाँसी दे दी। बिस्मिल के साथ ही अशफ़ाक को फैजाबाद जेल में और रोशन सिंह को इलाहबाद के नैनी जेल में फाँसी दी गयी।
इसी मौके पर राम प्रसाद बिस्मिल की लोकप्रिय रचना 'सरफरोशी की तम्मना' के इतिहास से...

"इंकलाब ज़िंदाबाद, कौमी एकता जिंदाबाद।"
अमर शहीद भगतसिंह के जन्मदिवस पर उन्हें शत शत नमन। 
इस मौके पर भगत सिंह की कौमी एकता का संदेश पूरे देश में फैलाना हमारा संकल्प होना चाहिए। इस अमर शहीद के लिए यही हमारी असल श्रद्धांजलि होगी।
जय हिंद, जय भारत।
इंकलाब जिंदाबाद।
#DilToFaujiHaiJi

1908 का अप्रैल महीना था।
खुदीराम के दोस्तों ने देखा कि अचानक खुदीराम ने नए जूतों की एक जोड़ी खरीदी है। वे चकित हुए क्योंकि खुदीराम लंबे समय से जूते नहीं पहनता था।
उन्होंने उत्सुकता जताई– तुमने नए जूते खरीदे हैं?
–हां, मैं शादी करने जा रहा हूं।
–कहां पर?
–उत्तर की ओर।
–वापस कब लौटोगे?
–कभी नहीं। अपने ससुराल में स्थायी रूप से रहूंगा।
दोस्तों ने मजाक समझा। उन्हें क्या पता था कि खुदीराम अब एक सामान्य नवयुवक न होकर क्रांतिकारी बन च...

Please reload